क्रोमा का कलर ग्रीन क्यों होता है? जानें इसके पीछे की साइंस

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Chroma Studio: आज की दुनिया रील की हो गई है, जिसे देखो रील बनाकर अपलोड कर रहा है. यहां जिसे से तात्पर्य क्रिएटर्स से है, जो सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करते हैं. कुछ ऐसे भी यूट्यूबर्स हैं, जो इसके लिए क्रोमा स्टूडियो का इस्तेमाल करते हैं. इस क्रोमा में जिस पर्दे का इस्तेमाल किया जाता है, उसका कलर ग्रीन क्यों होता है? यह बहुत कम लोगों को पता होता है. अगर आप इस सवाल का जवाब नहीं जानते हैं तो आज की स्टोरी आपके लिए है. आइए यह जानने की कोशिश करते हैं कि दूसरे कलर के पर्दे का इस्तेमाल क्रोमा स्टूडियो के लिए क्यों नहीं किया जाता है.

ग्रीन कलर के पर्दे से तैयार होता है क्रोमा 

किसी भी अन्य कलर की तुलना में हरे रंग में लाइट को अपने अंदर समाहित करने की क्षमता सबसे अधिक होती है. और एक मेन कारण यह है कि मानव शरीर में हरा रंग नहीं पाया जाता है. इसलिए जब वीडियो शूट करने के बाद उसके पीछे का बैकग्राउंड हटाकर अपने हिसाब से विजुअल लगाने की बारी आती है तो ग्रीन कलर एक बेस्ट ऑप्शन बनकर सामने आता है. उसमें क्रोमा कट शानदार निकलता है. यही वजह है कि ग्रीन कलर का इस्तेमाल किया जाता है. क्रोमा कट वीडियो एडिटिंग टूल है, जिसकी मदद से विजुअल के मेन पार्ट को छोड़कर बैकग्राउंड के सेम कलर को आसानी से रिप्लेस कर दिया जाता है. यह सॉफ्टवेयर किसी भी कलर को बैकग्राउंड से रिप्लेस कर सकता है. चूंकि ग्रीन कलर की तुलना में अन्य कलर के क्रोमा कट के दौरान मेन विजुअल पर भी असर पड़ जाता है. इसलिए ग्रीन रंग के क्रोमा स्टूडियो का इस्तेमाल किया जाता है. 

सब टेक्नोलॉजी का है खेल

बीबीसी साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्रोमा कीइंग नामक एक तकनीक है, जहां किसी को हरे स्क्रीन के सामने खड़ा करके फिल्म शूट किया जाता है. किसी भी हरे रंग को डिजिटल रूप से फ़िल्टर किया जाता है और बैकग्राउंड को वीडियो से रिप्लेस कर दिया जाता है. यदि विषय हरे रंग का कुछ भी वह व्यक्ति पहनता है, तो बैकग्राउंड इमेज उसे भी रिप्लेस कर देती है. 

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