चंद्रयान से कितनी अलग है गगनयान की पहली उड़ान… जो ऊपर जाएगा और फिर वापस पृथ्वी पर आएगा भी!

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Gaganyaan: गगनयान, भारत का महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों, जिन्हें व्योमनॉट्स के नाम से भी जाना जाता है, को अंतरिक्ष में भेजकर इतिहास बनाने के लिए तैयार है. परीक्षण की शुरुआत 21 अक्टूबर से होने जा रही है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नेतृत्व में यह कार्यक्रम भारत के अंतरिक्ष इनोवेशन प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. गगनयान के साथ, भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान में सक्षम देशों के खास क्लब में शामिल होने की कगार पर है, जो सितारों पर अपनी नजरें जमा रहा है.

गगनयान एक ड्रीम प्रोजेक्ट

भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने का विचार दशकों से एक सपना रहा है. गगनयान की शुरुआत 2000 के दशक की शुरुआत में हुई थी, लेकिन औपचारिक घोषणा 2018 में की गई थी. तब से इसरो इस सपने को वास्तविकता में बदलने के लिए तेजी से काम कर रहा है और आवश्यक तकनीक और बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है.

गगनयान का उद्देश्य विशेष रूप से मानव अंतरिक्ष उड़ान टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की एडवांस स्पेस पावर को प्रदर्शित करना है. बता दें कि यह कार्यक्रम भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष यान पर अंतर्राष्ट्रीय स्पेस यात्रियों की मेजबानी के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करता है. अंतरिक्ष में व्योमनॉट्स भेजने से वैज्ञानिक प्रयोगों, टेक और माइक्रोग्रैविटी में रिसर्च करने की संभावना खुल जाती है. इससे स्सेपस टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा.

गगनयान चंद्रयान से अलग कैसे?

गगनयान एक मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है जो अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने पर आधारित है, जबकि चंद्रयान एक चंद्रमा पर भेजा गया रोबोटिक अंतरिक्ष यान है, जिसका उपयोग करके चंद्रमा का अध्ययन करने पर केंद्रित है. दोनों कार्यक्रम भारत के अंतरिक्ष इनोवेशन प्रयासों में महत्वपूर्ण मील के पत्थर का प्रतिनिधित्व करते हैं. 

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