पूरी तरह से टाटा की हुई कैरटलेन, टाइटन ने खरीद ली बाकी बची हिस्सेदारी, इतने में बनी डील

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टाटा समूह की टाइटन कंपनी (Titan Co) ने ज्वेलरी ब्रांड कैरटलेन की बाकी बची पूरी हिस्सेदारी खरीद ली है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक खबर के अनुसार, कैरटलेन ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड (CaratLane Trading Pvt Ltd) के सीईओ मिथुन सचेती (Mithun Sacheti) ने अपनी 27 फीसदी हिस्सेदारी टाइटन को बेच दी है.

पहले से टाइटन के पास बड़ी हिस्सेदारी

रिपोर्ट के अनुसार, टाइटन ने कैरटलेन की बची 27.18 फीसदी हिस्सेदारी 4,621 करोड़ रुपये में खरीद ली है. कैरटलेन में पहले से ही टाइटन के पास बहुलांश हिस्सेदारी है और ज्वेलरी ब्रांड टाइटन की सब्सिडियरी कंपनी है. सचेती और उनके परिवार के पास कैरटलेन के 91,90,327 इक्विटी शेयर थे. अब इन सारे शेयरों के लिए टाइटन के साथ शेयर पर्चेज एग्रीमेंट हुआ है.

ढाई महीने में सौदा पूरा होने की उम्मीद

अभी कैरटलेन में टाइटन की शेयरहोल्डिंग 71.09 फीसदी है. 21 फीसदी से ज्यादा शेयरों को खरीदने के बाद टाइटन की कैरटलेन में हिस्सेदारी बढ़कर 98.28 फीसदी पर पहुंच जाने वाली है. टाइटन को उम्मीद है कि यह सौदा 31 अक्टूबर 2023 तक पूरा हो जाएगा और

उससे पहले भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग समेत सभी नियामकीय मंजूरियां प्राप्त कर ली जाएंगी.

इस सौदे में कैरटलेन की इक्विटी वैल्यू करीब 24,500 करोड़ रुपये मानी गई है. इससे पहले जून में ऐसी खबरें आई थीं कि टाइटन के जरिए टाटा समूह कैरेटलेन की बची-खुची हिस्सेदारी को भी खरीद सकती है.

ऐसा है कैरटलेन का कारोबार

कैरटलेट एक ज्वेलरी कंपनी है, जिसकी शुरुआत सितंबर 2007 में हुई थी. इस कंपनी का कारोबार भारत के अलावा अमेरिका में भी है. कंपनी ज्वेलरी की मैन्यूफैक्चरिंग व बिक्री करती है. वित्त वर्ष 2022-23 में कैरटलेन का टर्नओवर 2,177 करोड़ रुपये रहा था.

टाइटन का ज्वेलरी वाला बिजनेस

टाटा समूह की टाइटन की बात करें तो उसकी ज्वेलरी यूनिट में पहले से तनिष्क जैसा ब्रांड है. अब कैरटलेन भी उसके पास है. वित्त वर्ष 2022-23 में टाइटन की ज्वेलरी यूनिट का टर्नओवर 31,897 करोड़ रुपये रहा था. यह टाइटन के कुल टर्नओवर के करीब 88 फीसदी के बराबर है.

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