सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के खिलाफ फ्रांस ने जारी किया अरेस्ट वारंट, जानें मामला

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France Issued Arrest warrant For Bashar al-Assad: फ्रांस (France) ने सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद (Bashar al-Assad) के खिलाफ इंटरनेशनल अरेस्ट वारंट जारी किया है. फ्रांस ने बशर अल-असद पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सीरिया में नागरिकों के खिलाफ प्रतिबंधित रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक दो जांच न्यायाधीशों ने मंगलवार (14 नवंबर) युद्ध अपराधों में संलिप्तता के लिए बशर अल-असद, उनके भाई माहेर अल-असद समेत दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ चार वारंट जारी किया गया है.

सीरियाई मानवाधिकार वकील और सीरियन सेंटर फॉर लीगल स्टडीज एंड रिसर्च के संस्थापक अनवर अल-बुन्नी ने CNN को बताया कि यह फैसला अभूतपूर्व था. ऐसा माना जाता है कि ये पहली बार है जब किसी देश ने किसी अन्य देश के मौजूदा प्रमुख के खिलाफ मानवता से जुड़े अपराधों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है.

इंटरपोल भी जारी कर सकता है रेड नोटिस
जर्मनी से CNN से बात करने वाले वकीलों में से एक माइकल चैमास के अनुसार इंटरपोल की तरफ से भी रेड नोटिस जारी किए जाने की उम्मीद है. इंटरपोल के अनुसार रेड नोटिस दुनिया भर में कानून प्रवर्तन से प्रत्यर्पण, आत्मसमर्पण या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई के लिए लंबित किसी व्यक्ति का पता लगाने और उसे अस्थायी रूप से गिरफ्तार करने के लिए किया जाता है. माइकल चैमास ने CNN को बताया कि सभी इंटरपोल सदस्य देशों को गिरफ्तारी वारंट का पालन करना चाहिए.

माइकल चैमास ने बुधवार (15 नवंबर) बताया कि डौमा शहर में नागरिकों के खिलाफ प्रतिबंधित रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल पर मार्च 2021 में सीरियन सेंटर फॉर मीडिया एंड फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन (SCM), ओपन सोसाइटी जस्टिस इनिशिएटिव (OSJI) और सीरियन आर्काइव की तरफ से कानूनी मामला सामने लाया गया था. इसके अलावा अगस्त 2013 में पूर्वी घोउटा जिले में हुए हमलों में 1,000 से अधिक लोग मारे गए.

सीरियाई सरकार ने जहरीली गैस का किया इस्तेमाल
सीरियाई सरकार पर दमिश्क के उपनगर घोउटा में जहरीली गैस का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था. उस वक्त घोउटा विद्रोहियों का गढ़ माना जाता था. सीरियाई सरकार विद्रोहियों से घोउटा को खाली कराने के लिए जोरदार कोशिश कर रहा था. उन्होंने घोउटा में जहरीली गैस का इस्तेमाल किया था. वकीलों के बयान में कहा गया कि अगस्त 2013 के हमलों में जीवित बचे लोगों की गवाही के आधार पर एक आपराधिक शिकायत के जवाब में जांच शुरू की गई थी.

सीरियन सेंटर फॉर मीडिया एंड फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन (SCM) के संस्थापक और महानिदेशक वकील माज़ेन दरविश ने बुधवार को एक बयान में कहा कि ये फैसला एक ऐतिहासिक न्यायिक मिसाल है. ये पीड़ितों के परिवारों और बचे लोगों के लिए एक नई जीत है. ये सीरिया में स्थायी शांति की राह पर एक कदम है. सीरियन आर्काइव के संस्थापक हादी अल खतीब ने कहा कि इन गिरफ्तारी वारंटों के साथ फ्रांस एक दृढ़ रुख अपना रहा है. दस साल पहले हुए भयानक अपराधों को बेहिसाब नहीं छोड़ा जा सकता है और न ही छोड़ा जाएगा.

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