हमास में काम करते हैं ये खास लड़ाके, इनकी ट्रेनिंग जान छूटने लगेंगे पसीने

1 min read

[ad_1]

Israel Hamas: इजरायल और फलस्तीनी हमास के बीच चल रहे वार को आठ दिन हो गए हैं. जैसे-जैसे संघर्ष आगे बढ़ रहा है. इजरायल के टार्गेटेड हमलों को लेकर नई जानकारी सामने आई है. इजरायल चुन-चुन कर इज़ अल-दीन अल-क़सम ब्रिगेड के लड़ाकों को खत्म कर रहा है. इनको हमास का दाया हाथ कहा जाता है. इनको नुकभा भी कहते हैं. नुकभा पहले भी इजरायल के साथ टकराव में शामिल हो चुका है, इस बार उनका हमला असाधारण रूप से विनाशकारी साबित हुआ है. आसान भाषा में कहें तो नुकभा की तुलना देश की सेना और कमांडो के यूनिट से की जा सकती है, क्योंकि उनकी प्रशिक्षण और भर्ती प्रक्रिया सैन्य कर्मियों की तरह ही होती है. 

खास तरीके से होती है ट्रेनिंग

ये नुकभा लड़ाके कठोर प्रशिक्षण से गुजरते हैं, विस्फोटकों, आधुनिक हथियार, टेक्नोलॉजी और यहां तक कि स्कूबा डाइविंग सहित पानी के नीचे युद्ध से निपटने में विशेषज्ञता हासिल करते हैं. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हमास को एक आतंकवादी संगठन माना जाता है, और नुकभा लड़ाके इसके लड़ाकू विंग के सदस्य हैं.

हमास आम तौर पर अपने सुरक्षा प्रभाग इज अल-दीन अल-कसम ब्रिगेड के लिए भर्ती करता है, और अपने रैंकों के भीतर से सबसे कुशल सेनानियों का चयन करता है. इसके बाद, उन्हें घरेलू और विदेश दोनों जगह व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त होता है. इसका उद्देश्य उन्हें प्रभावी ढंग से युद्ध में शामिल होने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करना है. एक बार जब नुकभा लड़ाके किसी संघर्ष में शामिल हो जाते हैं, तो वे अपने नेतृत्व से स्वतंत्र रूप से काम करते हैं. इजरायल इन लड़ाकों पर 2014 में हुए वार में भी हमला किया था. तब वह काफी कमजोर हो गए थे. 

क्या है इतिहास?

इज़ अल-दीन अल-क़सम ब्रिगेड नाम एक सीरियाई लड़ाके से लिया गया है, जिसे 1935 में ब्रिटिश सेना ने मार डाला था. इस ब्रिगेड की औपचारिक स्थापना 1992 में हुई थी. हमास में एक दोहरी संगठनात्मक संरचना है जिसमें राजनीतिक ब्यूरो और सुरा परिषद शामिल हैं. राजनीतिक ब्यूरो संगठन के भीतर सर्वोच्च अधिकार रखता है और कथित तौर पर इसका मुख्यालय कतर में है.

राजनीतिक ब्यूरो के सदस्यों का चुनाव सुरा परिषद द्वारा किया जाता है, जिसके प्रतिनिधि न केवल गाजा पट्टी में बल्कि वेस्ट बैंक सहित अन्य पड़ोसी क्षेत्रों में भी हैं. गाजा सरकार पदानुक्रम में तीसरा स्थान रखती है. प्रशासनिक दृष्टिकोण से, सैन्य शाखा चौथे स्थान पर है, लेकिन युद्ध के दौरान वे मुख्य भूमिका निभाते हैं और अक्सर अपने नेतृत्व से स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं. फिलहाल इजरायली सेना का ध्यान इन लड़ाकों को खत्म करने पर है, उनका लक्ष्य इस समूह के हर सदस्य को खत्म करना है. 

ये भी पढ़ें: India Pakistan Match: पाकिस्तान से कितने लोग भारत मैच देखने आए हैं? जानिए किन-किन लोगों को मिल रहा है वीजा

[ad_2]

Source link

You May Also Like

More From Author