22 साल के इंजीनियरिंग स्‍टूडेंट ने अमेजन को लगाया लाखों का चूना, ऐसे करता था खरीदारी

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बेंगलुरु से चौंकाने वाली खबर है. महज 22 साल के एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट (Bengaluru boy amazon scam) ने अमेजन के साथ 20 लाख रुपये का रिफंड स्कैम (Bengaluru amazon frefund scam) कर दिया. इसने आईफोन और मैकबुक जैसे महंगे गैजेट्स की फर्जी रिफंड की और यहां तक कि रिफंड पाने में भी सफल रहा. पुलिस ने इस घोटाले के संबंध में उत्तरी बेंगलुरु में रहने वाले इंजीनियरिंग स्टूडेंट चिराग गुप्ता को गिरफ्तार किया है. ठगी के इस मामले ने कंपनी को हैरत में डाल दिया.

अमेज़न को 3.40 लाख रुपये का लगाया था चूना

खबर के मुताबिक, गुप्ता ने एक दोस्त की मदद से 16 आईफोन और 2 मैकबुक के फर्जी रिटर्न बनाए, जहां वह यह दिखाने के लिए बैकएंड सिस्टम में हेरफेर (amazon refund scam) करेगा कि आइटम वापस कर दिया गया है. द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, 1.27 लाख रुपये का आईफोन 14 प्रो मैक्स 15 मई को, आईफोन 14 जिसका मूल्य 84,999 रुपये है को 16 मई को और 90,999 रुपये और 84,999 रुपये के दो आईफोन 14 मॉडल 17 मई को खरीदा गया.  इन सभी गैजेट्स का पेमेंड क्रेडिट कार्ड और यूपीआई के जरिये किया गया था. आरोपी इन सभी सामानों से अमेज़न को 3.40 लाख रुपये का चूना लगा चुके थे.

तब अमेजन को हुआ संदेह

खबर के मुताबिक, अमेजन को गुप्ता की खरीदारी की आदतों पर तब संदेह हुआ और तभी उन्हें पता चला कि ये सामान वास्तव में रिफंड नहीं किए गए हैं. इन सामानों को एक ही पते से खरीदा गया था और उन्हें returned के रूप में चिह्नित किया गया था, हालांकि, उन्होंने इसे कभी भी इन्वेंट्री में नहीं बनाया. तभी एक एग्जिक्यूटिव को गुप्ता से मिलने और यह पूछने के लिए भेजा गया कि उन्होंने वे सभी डिवाइस क्यों लौटा दिए. इस पर गुप्ता ने बताया कि डिवाइस ठीक काम कर रहे थे, लेकिन मध्य प्रदेश के उनके एक दोस्त ने उन्हें बताया था कि उनके पास सामान को रिफंड किए बिना रिफंड पाने का एक तरीका है.

बैंक खातों में 30 लाख रुपये फ्रीज

पुलिस ने इस इंजीनियरिंग स्टूडेंट चिराग गुप्ता से 20.34 लाख रुपये के गैजेट जब्त किए और आरोपी से जुड़े कई बैंक खातों में 30 लाख रुपये फ्रीज कर दिए. गौर करने वाली बात यह है कि इस स्कैम (Bengaluru amazon frefund scam) का मुख्य आरोपी अमेजन का पूर्व कर्मचारी है जिसने सिस्टम के बैकएंड में हेरफेर किया था. यह पता चला कि गुप्ता और उनके दोस्त क्रिप्टो ट्रांजैक्शन के जरिये इन सामानों को बेच रहे थे. गुप्ता को हर सामान पर अर्जित लाभ से कमीशन हासिल होता था.

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