नई दिल्‍ली. देश में रविवार को रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) का त्‍योहार धूमधाम से मनाया जाएगा. इस दिन अंतरिक्ष में भी एक खगोलीय घटना होने वाली है. अमेरिकन एस्‍ट्रोनॉमिकल सोसायटी के अनुसार रविवार को आसमान में नीला चांद (Blue Moon) दिखेगा. स्काई एंड टेलिस्कोप पत्रिका के अनुसार चांद  (Moon) वास्तव में ऐसी रातों में नीला नहीं होता है, बल्कि ‘ब्लू मून’ का मतलब होता है चार पूर्णिमा वाले सीजन की तीसरी पूर्णिमा.

यहां जानिए इस बारे में सबकुछ-
1. इस शब्दावली को एक बार शौकिया खगोलशास्त्री ह्यूग प्रुएट द्वारा गलत तरीके से समझया गया था, जिन्होंने गलत तरीके से यह मान लिया था कि मेन फार्मर्स के पंचांग में दी गई परिभाषा का अर्थ ब्लू मून्स एक महीने में दूसरी पूर्णिमा को संदर्भित करता है. प्रुएट स्काई एंड टेलिस्कोप पत्रिका के लिए लगातार लिखते थे.

2. हालांकि अमेरिका के नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) का मानना है कि ब्लू मून दो तरह के होते हैं- मासिक और मौसमी. प्रुएट की ब्लू मून की परिभाषा है, जिसे नासा मासिक ब्लू मून कहता है. नासा के अनुसार, ‘एक मासिक ब्लू मून एक कैलेंडर माह में दो पूर्ण चांद के साथ दूसरा पूर्ण चांद है. फिर एक सीजनल या मौसमी ब्लू मून होता है- यह एक खगोलीय सीजन का तीसरा पूर्ण चांद है, जिस सीजन में चार पूर्ण चंद्रमा होते हैं.’

3. स्काई एंड टेलिस्कोप के संपादकों और लेखकों ने चार पूर्णिमा वाले मौसम में तीसरी पूर्णिमा को परिभाषित करने के लिए ब्लू मून शब्द का उपयोग करना जारी रखा है. स्काई एंड टेलिस्कोप के ऑब्जर्विंग एडिटर डायना हैनिकेनन का कहना है, ‘ब्लू मून को पेश करने का मतलब है कि पारंपरिक पूर्णिमा के नाम, जैसे कि वुल्फ मून और हार्वेस्ट मून, अपने सीजन के साथ रहें.’

4. ‘ब्लू मून’ शब्द का अर्थ यह नहीं है कि चंद्रमा अपना रंग बदलता है. ऐसा सिर्फ हवा में पानी की बूंदों, कुछ विशेष प्रकार के बादलों, प्राकृतिक आपदाओं जैसे ज्वालामुखी की राख और धुएं द्वारा वातावरण में फेंके गए कणों के कारण हो सकता है. यह एक अत्यंत दुर्लभ घटना है. नासा का कहना है कि 1883 में क्राकाटोआ नामक इंडोनेशियाई ज्वालामुखी में विस्‍फोट के बाद वर्षों तक नीले रंग के चांद दिखाई दिए.

5. पूरे इतिहास में कई अन्य ज्वालामुखी और यहां तक ​​कि जंगल की आग, चंद्रमा के रंग को प्रभावित करने के लिए जाने जाते हैं. एक नियम के रूप में एक ब्‍लू मून बनाने के लिए धूल या राख के कण लगभग 0.6 माइक्रोन से बड़े होने चाहिए, जो लाल बत्ती को बिखेरता है और नीली रोशनी को स्वतंत्र रूप से गुजरने देता है. यह सब कहने के बाद जिसे हम ब्लू मून कहते हैं वो आमतौर पर हल्के भूरे, सफेद या पीले रंग का दिखाई देता है. ठीक वैसे ही जैसे किसी अन्य रात में चंद्रमा होता है.

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