जैसे – जैसे दुनिया डिजिटल क्रांति की और कदम बड़ा रही है वैसे – वैसे साइबर अपराधी भी ऑनलाइन नए – नए तरीकों से जनता की खून – पसीने की कमाई को ठगने के लिए नए – नए तरीके इजाद करने में लगे हुए है। जिसका प्रमुख कारण – (1) देश में इसके लिए कोई कठोर कानून नहीं होना (2) पुलिस की साइबर सेल का एडवांस नहीं होना (3) जनता में जागरूकता कमी। वर्ष 2012 में 3377 साइबर क्राइम रिपोर्ट दर्ज की गई थी और 2020 में रिपोर्टिंग की संख्या 50 हज़ार तक पहुंच गयी तीन साल पहले लॉंच हुए साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अब तक अलग-अलग प्रकार की 11 लाख से ज़्यादा शिक़ायतें दर्ज हो चुकी हैं, सोशल मीडिया क्राइम की भी दो लाख से ज़्यादा शिक़ायतें दर्ज की जा चुकी हैं। गृह मंत्रलय के I4C और CIS डिवीजन के तहत सात स्तंभों में साइबर अपराधओं की रोकथाम के लिए काम चल रहा है – राष्ट्रीय साइबर अपराध थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिर्पोटिंग पोर्टल, राष्ट्रीय साइबर अपराध प्रशिक्षण केंद्र, राष्ट्रीय साइबर अपराध अनुसंधान और नवाचार केंद्र, जॉइंट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन, राष्ट्रीय साइबर अपराध इकोसिस्टम प्रबंधन यूनिट और राष्ट्रीय साइबर अपराध फॉरेंसिक प्रयोगशाला इसके लिए कार्यरत है। डेटा और इंफॉर्मेशन यह दोनों आने वाले दिनों में बहुत बड़ी आर्थिक ताकत बनने वाली है इसीलिए डेटा और इंफॉर्मेशन की सुरक्षा के लिए भी हमें ख़ुद को तैयार करना होगा।

साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिए सरकार को क्या करना चाहिए – (1) भारत में कठोर कानून की आवश्यकता है जिसपर वर्तमान सरकार को ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है। (2) पुलिस साइबर सिस्टम को एडवांस करने की आवश्यकता है और पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग की आवश्यकता है। (3) जनता में शासन – प्रशासन या एनजीओ के सहयोग द्वारा जन – जाग्रति की आवश्यकता है जिसमे अभी तक सरकार फ़ैल ही साबित हुई है सरकार सोशल मीडिया पर जरुर प्रचार कर रही है परन्तु प्रत्येक ग्राम पंचायत में इसके लिए कार्यशाला का आयोजना अति आवश्यक है। (4) अगर सरकार चाहे तो रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के माध्यम से नियम बना सकती है की ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त फण्ड को प्राप्तकर्ता अगले 24 घंटे के लिए उपयोग नहीं कर सकेगा अर्थात उक्त फण्ड लॉक रहेगा ताकि शिकायत प्राप्त होने पर बैंक द्वारा वह फण्ड फरियादी के अकाउंट में स्थानान्तरण कर दिया जाए।

साइबर अपराध से बचने के लिए जनता को क्या करना चाहिए – (1) किसी भी स्त्रोत से प्राप्त मेसेज में दी गई लिंक को ओपन नहीं करें यह ऑफर वाले मेसेज होते है जिसमे फ्री रिचार्ज सहित कई अन्य फ्री ऑफर के बारे में बताया जाता है। (2) गूगल प्लेय स्टोर से अनजान एप्प को डाउनलोड नहीं करें केवल विश्वसनीय बैंकिंग एप्प का ही उपयोग करें। (3) ऑनलाइन लोन देने वाले एप्प का गलती से भी उपयोग ना करें यह आपका डाटा एकत्रित करते है। (4) बैंक कभी भी फ़ोन पर ओटीपी नहीं मागता है इसलिए किसी को भी किसी भी प्रकार का ओटीपी साझा नहीं करें और तुरंत पुलिस को सूचित करें।

साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत – साइबर अपराध की घटना गठित होने या अपराध का प्रयास होने पर पीड़ित तुरंत साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल टोल फ्री 1930 पर शिकायत दर्ज कर सकते है या साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की वेबसाइट https://cybercrime.gov.in पर विजिट कर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते है जिसका तुरंत प्रभाव होता है एवं समय पर शिकायत करने पर निश्चित पेमेंट रिफंड होता है और अन्य शिकायतों का समाधान होता है। किसी आपात स्थिति में या साइबर अपराधों के अलावा अन्य अपराधों की रिपोर्ट करने के लिए कृपया स्थानीय पुलिस से संपर्क करें। राष्ट्रीय पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100 है। राष्ट्रीय महिला हेल्पलाइन नंबर 181 है।

संदीप कुमार – साइबर एक्सपर्ट एवं सदस्य एनएचआरसीसीबी