हजारों असहाय पीड़ितों की सहायता कर बन चुके है “यूथ आइकॉन”

 

अनअकैडमी के फाउंडर रोमन सैनी का नाम और कहानी तो आपने सुनी ही होगी इसी प्रकार की कहानी है संदीप की जीवन में हर बच्चा बड़ा होकर डॉक्टर, इंजीनियरिंग, साइंटिस्ट आदि बनने के लिए सपना देखता है और उसे पूरा करने में लग जाता है परन्तु कुछ इन्सान अलग सोच वाले होते है जो सबसे अलग कर कर दिखाते है और देश दुनिया में ख्याति प्राप्त करते है ऐसा ही एक नाम वर्तमान में मध्य प्रदेश सहित देश में वायरल हो रहा है जिनका नाम है संदीप कुमार।

कौन है संदीप कुमार ?
एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे है संदीप कुमार जिनके पिता एक शिक्षक और माता गृहणी है प्राप्त जानकारी के अनुसार उनका बचपन से ही सपना प्रशासनिक सेवा का था परन्तु कॉलेज के दिनों में उनके साथ कुछ ऐसी घटना घटी की इन्होने असहाय पीड़ितों को न्याय दिलाने का रास्ता चुन लिया। संदीप ने हर उस पीड़ित की सहायता करने के लिए हाथ आगे बड़ा दिए जो पुलिस, कोर्ट कचहरी, समाज आदि से न्याय की उम्मीद खो चुके थे और अपने जीवन में हार चुके थे।

संदीप ने मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई और लोगों की सहायता शुरू कर दी संदीप ने पिछले 07 वर्षों में सम्पूर्ण भारत में सेंकडों असहाय सिविल सर्विस के छात्रों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने में सहायता की और स्वयं भी पढाया, सेंकडों शोषित / पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने में उनकी सहायता की और उनके टूटते घर बसाये, बाल उत्पीडन और पुरुष उत्पीडन के कई मामले में पीड़ितों की सहायता कर सेंकडों लोगों को न्याय दिलाया, मानसिक प्रताड़ना / उत्पीडन आदि से ग्रस्त होकर आत्महत्या जैसे कदम उठाने वाले लोगो को मोटीवेट कर उन्हें एक बेहतर जीवन प्रदान किया, कई भ्रष्ट शासकीय कर्मचारीयों को निलंबित करवाया, यंहा तक की जेल बंदियों को गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिलने के मामले में उन्होंने बंदियों के लिए जेल में भी आन्दोलन किये और जेल के सभी बंदियों ने अंत समय तक उनका साथ दिया और अंत में जेल प्रशासन को झुकना पड़ा और उनकी मांगे पूरी हुई, सेंकडों मृतकों के परिवार को सरकार से मुआवजा दिलाना, आरटीआई के माध्यम से कई भ्रष्टाचार उजागर करना और लोगों को उनके अधिकार दिलाना, कोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर कर जनहित के मुद्दे उठाना, जनहित के लिए बड़े स्तर पर कई आन्दोलन किये जिससे जिला प्रशासन तक की नींद उड़ा दी गई आदि अनेकों काम कर आज संदीप लाखों असहाय पीड़ितों के लिए न्याय की आस बन चुके है और यूथ आइकॉन के नाम से जाने जाने लगे है एवं कमाल की बात यह है की वह पीड़ित का आवेदन तक स्वयं के पैसे खर्च कर दर्ज करवाते है / न्यायलय में जनहित याचिकाएं और परिवाद स्वयं के पैसे से दर्ज करते है।

इसके लिए संदीप को कई सम्मान भी प्राप्त हुए है। संदीप के सोशल मीडिया पर दस हजार से ज्यादा फॉलोवर है और कोई भी पीड़ित उनसे कोई सहायता की मांग करते है तो वह न्याय नहीं मिलने तक उनकी सहायता करते है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वह असहाय वृद्धों / माताओं / विधवा बहनों / बच्चों के लिए अनाथ आश्रम की शुरुआत भी कुछ महीनो में करने जा रहे है जिसमे उनकी शिक्षा / स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाएगा। जिसमे उन सभी अनाथो को स्थान दिया जाएगा और उनका पालन पोषण किया जाएगा। उनकी इसी ख्याति और समर्पण को देखते हुए एक संस्थान द्वारा उनके संघर्ष और कार्यशेली पर एक पुस्तक भी लिखी जा रही है जिसे अगले वर्ष प्रकाशित किया जाना है।

क्यों चर्चित है संदीप : संदीप ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत सरकार और पुलिस प्रशासन जैसी संवैधानिक संस्थाओं की कार्यशेली के विरुद्ध तक सुप्रीमकोर्ट में जनहित याचिकाएं दर्ज की जिसके परिणाम स्वरूप उक्त संस्थाओं में काफी सुधार देखने को मिला और आम जनता को राहत मिली। साथ ही संदीप मानवाधिकार के क्षेत्र में देश विदेश में आए दिन सेमिनार में भाग लेते रहते है।

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