भोपाल. नई सदी में सबसे युवा जनसंख्या देश बन चुके भारत के शिक्षा जगत के सामने आधुनिक विज्ञान और तकनीक को साथ लेकर गुणवत्तापूर्वक शिक्षा देने की सबसे बड़ी चुनौती है, इस काम में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी. यह विचार यहां क्राइस्ट कॉलेज में नई राष्ट्रीय नीति-2020 पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रो.पुष्पेन्द्र पाल सिंह और प्रो. रमेश बाबू ने व्यक्त किए. संगोष्ठी में देश भर के विभिन्न राज्यों के शोधार्थियों की ओर से 42 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: अवसर और चुनौतियां विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. रमेश बाबू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy 2020) से जुड़े हर पहलू पर प्रकाश डाला. साथ ही उन्होंने शिक्षकों की भी भूमिका, अवसर और चुनौतियों पर चर्चा की. संगोष्ठी के वक्ता प्रो. पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने विद्यार्थी केन्द्रित शिक्षा पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में छात्रों के लिए उपयोगी नई वैज्ञानिक, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल प्राथमिकता पर होना चाहिए. उन्होंने नई शिक्षा नीति में एकेडेमिक बैंक और क्रेडिट पर प्रकाश डाला.

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संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह के मुख्यअतिथि के रूप में मप्र उच्च शिक्षा विभाग के उपायुक्त डॉ. धीरेन्द्र शुक्ला, सेंट पॉल प्रोविंस भोपाल के फादर जस्टिन, महाविद्यालय के प्राचार्य फादर जॉनसन, निदेशक फादर डोमिनिक और देश के विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थी उपस्थित थे. डॉ. दिवाकर सिंह ने देश के विभिन्न राज्यों से आए 42 शोध पत्र संगोष्ठी के चार सत्रों में प्रस्तुत किए. संगोष्ठी के सत्रों के संबंधित विषय विशेषज्ञों डॉ. एफ. एस.खान, डॉ. नीति दत्ता, प्रो. पुष्पेन्द्र पाल सिंह, डॉ. इंद्रजीत दत्ता की उपस्थिति में संचालित किया गया.

Tags: New Education Policy 2020



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