कोटा. शहर के दशहरा मैदान में में चल रहे कृषि महोत्सव में देशभर के प्रगतिशील किसान एवं कृषि से जुड़े स्टार्ट अप पहुंचे हैं. महोत्सव में बिहार की पटना निवासी रिचा वात्सायन प्रोडक्ट काफी पसंद किया जा रहा है. रिचा ने एग्रीकल्चर वेस्ट से बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड बनाया है. रिचा का दावा है कि यह महिलाओं के लिए सेफ व हाइजीनिक होते हैं. साथ ही इसके उपयोग से महिलाओं की स्किन को भी किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचेगा. रिचा ने बताया कि सेनेटरी नैपकिन में ऐसे रसायन होते हैं, जिनसे एलर्जी, खुजली और संक्रमण हो सकता है. कई सेनेटरी नैपकिन में क्लोरीन भी होता है, जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकता है. सेनेटरी नैपकिन में लगभग 90 प्रतिशत प्लास्टिक होता है, जो उन्हें गैर-बायोडिग्रेडेबल बनाता है और पर्यावरण को प्रदूषित करता है.

प्रदूषण को रोकने में सहायक होगा

रिचा ने बताया कि उनके इस पैड से किसी तरह का कोई प्रदूषण भी नहीं होगा. इको फ्रेंडली सेनेटरी पैड यह मेंस्ट्रुअल वेस्ट से होने वाले प्रदूषण को रोकने में सहायक होगा. नॉर्मल सेनेटरी पैड 95 फीसदी प्लास्टिक से बने होते हैं. इस बायोडिग्रेडेबल पैड को डिकम्पोज होने में करीब 6 महीने लगेंगे. इसका उपयोग ऑर्गेनिक मैन्योर यानी खाद के रूप में भी किया जा सकता है. नॉन-बायोडिग्रेडेबल पैड्स फेंकने के बाद 500-800 साल तक धरती को प्रदूषित करते रहते हैं.

रिचा ने बताया कि उनके इको फ्रेंडली सेनेटरी पैड्स केले के पेड़ और तने से बनाए जा रहे हैं. केले की फसल करने के बाद जब उपज ले ली जाती है, तब यह पेड़ और तना किसानों के काम नहीं आता है. फसल के बाद किसान या तो इसे फेंक देते हैं या फिर खेत में ही जला देते हैं. इससे वायु प्रदूषण भी होता है और खेत को भी नुकसान पहुंचता है. हालांकि, इस तने और पेड़ के रेशे को निकालकर सेनेटरी पैड वे बनाती हैं. इस सेनेटरी पैड की कीमत 139 रुपए है.

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FIRST PUBLISHED : January 25, 2023, 19:44 IST



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