Chandrayaan 3: चांद पर लैंडिंग सिर्फ एक सेकेंड में होती है… जानिए इतनी देर में क्या होता है

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चंद्रयान-3 मिशन में लैंडर विक्रम चांद के करीब पहुंच गया है. विक्रम चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए तैयार है, जिसके बाद इससे एक रोवर प्रज्ञान निकलेगा और फिर वो चांद पर अपना काम करेगा. विक्रम के चांद पर लैंड करने को लेकर लंबे समय से काम चल रहा है और अभी भी सभी वैज्ञानिकों का ध्यान इसकी सफल लैंडिंग पर है. ये तो आप जानते हैं कि पहले विक्रम की स्पीड को धीरे धीरे कम किया जाएगा और फिर चांद की सतह पर उतारेगा. लेकिन, इस प्रोसेस में आखिरी एक सेकेंड बहुत अहम है, क्योंकि इस वक्त काफी गड़बड़ होने की संभावना रहती है.  

ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि आखिर इस एक सेकेंड को क्यों अहम माना जा रहा है और इतने से वक्त में ऐसा क्या होता है, जिस वजह से सभी का ध्यान इसी पर है. तो समझते हैं आखिर एक सेकेंड में होने वाली लैंडिंग का क्या सीन है…

कौनसा एक सेकंड है अहम?

उस खास सेकंड की बात करने से पहले आपको इसकी स्पीड का गणित समझाते हैं. दरअसल, जब लैंडर चांद की जमीन से धीरे धीरे नीचे आता है. पहले यह 7.4 किलोमीटर की दूरी पर रहता है और फिर ये 6.8 किलोमीटर तक आता है. फिर अलग- अलग स्टेज में नीचे आथा है, जिसमें 800 मीटर तक 150 मीटर तक, 60 मीटर  और फिर 10 मीटर तक नीचे उतरता है. जब लैंडर 10 मीटर पर रहता है, तब अहम सीन शुरू होता है.

दरअसल, इस वक्त इसकी स्पीड भी 10 मीटर प्रति सेकंड हो जाती है और ऐसे में यह लास्ट स्टेज एक घंटे में पूरी होती है. सिर्फ एक सेकंड में ही लैंडर 10 मीटर से नीचे गिर जाता है और कुछ गड़बड़ हो जाए तो ये स्पीड बढ़ जाती है और एक झटके में ये नीचे गिर जाता है. उस वक्त लैंडर और वैज्ञानिकों के पास कुछ भी करने के लिए ऑप्शन नहीं होता है और लैंडिंग में दिक्कत हो जाती है. वैसे 10 मीटर तक आने में वैज्ञानिकों के पास काफी अवसर होता है, क्योंकि 10 मीटर तक पहुंचने में कई मिनट का वक्त लगता है, लेकिन इसके बाद का प्रोसेस सिर्फ 1 सेकेंड में हो जाता है. ऐसे में इस एक सेकंड को खास माना जाता है.

हालांकि, जब लैंडर 800-900 मीटर के करीब होता है, उसी वक्त से अहम समय शुरू हो जाता है. यहां से काफी धीरे-धीरे ध्यान से लैंडर को नीचे उतारा जाता है. मगर एक सेकंड को बेहद खास माना जाता है, जिसमें लैंडिंग होती है और जमीन से टकराने का डर रहता है. 

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